'अविरल मंथन' राजेंद्र वर्मा के संपादन में पहले त्रेमासिक प्रकाशित होती थी (१९९६ से २००० तक) , पर बाद में कतिपय कारणों से वार्षिक हो गयी। २००३ से इसका प्रकाशन स्थगित है।
पत्रिका में हिंदी साहित्य की सभी विधाओं की रचनाएँ प्रकाशित होती थीं-- कहानियां, गीत, गज़लें, दोहे, कविताएँ, हाइकू, समीक्षाएं आदि। इसके कहानी, गज़ल, गीत लघुकथा और हाइकू विशेषांक खूब चर्चित हुए।
'अविरल मंथन' में देश के प्रमुख रचनाकारों के साथ-साथ नए रचनाकार भी प्रकाशित हुए हैं। चर्चित रचनाकारों में, पद्मविभूषण नीरज, पद्मश्री चिरंजीत, पद्मविभूषण श्रीलाल शुक्ल, प्रो.सिन्दूर, नीलम श्रीवास्तव, चंद्रसेन विराट, अदम गोंडवी, निदा फाजली, क्रिश्नाविहारी नूर, वाली आसी, मुनव्वर राणा, कुंवर बेचैन, शिवओम अम्बर, अशोक अंजुम, महेश कटारे, शिवमूर्ति, अमरीकसिंह दीप, शंकर पुड़ताम्बेकर, कमल चोपडा, सुकेश साहनी, रमाकांत श्रीवास्तव, भगवतशरण अग्रवाल, सुधा गुप्ता, उर्मिला कॉल, डॉ.सुरेन्द्र वर्मा आदि ।
Saturday, August 13, 2011
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